Wednesday, April 22, 2009

सिर्फ़ 24 गेंदों में ख़ुद को साबित करते सौरव

ये कप्तान ब्रैंडन मैकुलम का हताशा में लिया गया फैसला भी कहा जा सकता है। इरफान पठान के आक्रामक स्ट्रोक प्ले का कोई जवाब न तो इशांत शर्मा की रफ़्तार भरी गेंदों के पास था, न ही नौजवान अशोक डिंडा के हौसलों में। बादलों से घिरे माहौल में अगर मैकुलम के गेंदबाज बल्लेबाजों को थाम नहीं पाते तो टॉस जीतकर किंग इलेवन पंजाब को पहले बल्लेबाजी के लिये उतारने का दांव बेकार चला जाता। सिर्फ 6 ओवर में ही इरफान इंग्लैंड के रवि बोपारा के साथ 47 रन स्कोर बोर्ड पर टांग चुके थे। यानी अगर यहाँ से मुकाबला इस रफ़्तार से आगे बढ़ निकालता तो पहले से ही विवादों में घिरी कोलकाता के लिये आगे का सफ़र बेहद मुश्किल हो जाता।

इरफान के इस आक्रामक मूड के दौरान कैमरा या तो कभी तनाव में सिगरेट के कश भरते शाहरुख खान तक पहुंचता। या ख़ुशी में झूमती प्रीति जिंटा को कैद करता। लेकिन फाइन लेग पर तन्हा तन्हा अपने से बतियाते सौरव तक कैमरा कम ही पहुंच रहा था। कल तक कोलकाता नाइट राइडर्स के कप्तान और आइकन सौरव इस मुकाबले में अभी तक हशिए पर थे। इन्हीं, सौरव गांगुली की ओर मैकुलम ने अपने आखिरी दांव की तरह गेंद उछाली।


सौरव के लिये जैसे ये अपने लम्हे को लपक लेना था। अब ये सौरव नहीं, उनके भीतर बैठा कभी हार ना मानने वाला सौरव गांगुली था। वो सौरव जो टीम में वापसी के लिये अपने चेहेते एडेन गार्डन में अकेला पसीना बहाते बहाते कभी थकता नहीं था। यही सौरव था, जिसने भारतीय क्रिकेट में ऐसी यादगार विदाई ली, जिसे कभी गावस्कर और कपिल जैसे लेजेंड्स भी हासिल नहीं कर पाये। ठीक खेल की स्टेज के बीच से। ऐसा सौरव आईपीएल की स्टेज पर ,वो भी अपने कोलकाता के लिये खेलते हुए यूं ही खारिज नहीं हों सकता। आज गेंद हाथ में लेकर रनअप पर उठे उनके कदम में आप इस बात को महसूस कर सकते थे। सौरव की दूसरी ही गेंद पर इरफान पठान के पुल स्ट्रोक को मुरली कार्तिक ने ठीक डीप मिड विकेट सीमा रेखा पर थाम लिया। सिर्फ दो गेंद बाद ही कट करने के फेर में रवि बोपारा के बल्ले का किनारा लेती गेंद जब विकेट के पीछे मैकुलम के दस्तानों में गयी तो डरबन पर पुराना सौरव लौट चुका था। अपने दायें हाथ को हवा में लहरा असीम ख़ुशी में डूब दौड़ लगाते सौरव से हम रुबरु थे। कुछ इस तरह कि विवादों के बीच से खुद को बाहर निकाल अपने होने और अभी न चुके होने का अहसास करा रहे हों।

यह सौरव अब इस धीमे विकेट पर अपनी लाइन और लेंग्थ में बदलाव कर रहे थे। रफ़्तार से भरमा रहे थे। मुझे बारह साल पहले टोरंटो में फेंके सौरव के स्पेल याद आ रहे थे। सौरव ने पांच मुकाबलों की सीरीज़ में 15 विकेट लिये थे। वो भी सईद अनवर,रमीज राजा,सलीम मलिक और मोइन खान, अफरीदी जैसे बेजोड़ बल्लेबाजी क्रम के खिलाफ। एक मुकाबले में तो उन्होने सिर्फ १5 रन देकर पांच विकेट अपने नाम किये थे।

बेशक आज बारिश से प्रभावित इस मुकाबले में क्रिस गेल की 44 रन की पारी ने कोलकाता को जीत थमा दी। लेकिन इस जीत की जमीं सौरव के फेंके 4 ओवर में ही तैयार हुई। वरना इरफान के आक्रामक तेवर के चलते डकवर्थ लुइस नियम भी कोलकाता के काम नहीं आ पाता। इस ढलती उम्र में सौरव का प्रदर्शन उन्हे इस आईपीएल में सीनियर खिलाडियों की कतार में शामिल कर रहा है, जिन्हे टी-20 की अंतरराष्ट्रीय स्टेज पर खारिज मान लिया गया है। द्रविड़ , सचिन, वार्न,कुंबले,हेडन और अब सौरव यही साबित कर रहे हैं। दिलचस्प है कि ट्वेंटी ट्वेंटी तो दूर द्रविड़ को एक दिवसीय मुकाबलों के लायक भी नहीं समझा जाता। कुंबले,हेडेन,वार्न,और सौरव आज इंटरनेशनल स्टेज से अलविदा ले चुके हैं.लेकिन ये सभी अपने बीते कल की छाप बराबर छोड़ रहे हैं। जैसा सचिन का कहना है की हमें या द्रविड़ को अब कुछ साबित नहीं करना है। हम तो सिर्फ अपने खेल का भरपूर आनंद ले रहे हैं। सचमुच ये सभी आनंद के बीच अपने क्रिकेट को परवान चढ़ा रहे हैं।

लेकिन सौरव अपने बीते कल की तरह आज भी एक लडाई लड़ रहे हैं- क्रिकेट प्रेमियों के जेहन में दर्ज सौरव गांगुली की शख्सियत को बने रखने की लडाई। भारत के महानतम खिलाड़ियों में शुमार सौरव को विवाद की छाया में समेटकर रखने की कोशिश होती है, और हर बार साबित करने की चुनौती सौरव को दी जाती है। ग्रेग चैपल विवाद से वनडे और टेस्ट टीम से बाहर करने और अब कोलकाता नाइट राइडर्स की कप्तानी छीनने तक हर बार सौरव को खुद को साबित करना पड़ा। शायद इसलिए निराश सौरव भावुकता में कह भी पड़ते हैं - हर बार मेरे साथ ही न जाने क्यूं ऐसा होता है।

लेकिन, वो सौरव जो कभी हार नहीं मानता। वो यहाँ भी हार नहीं मानेगे। सौरव यहाँ भी पीछे नहीं हटेंगे । यह उनके हाथ से छूटती 24 गेंदों ने बखूबी साबित किया है। फिर यही तो सौरव गांगुली होने का मतलब है।

2 comments:

नीरज गोस्वामी said...

सौरव का मतलब ही है एक झुझारू इंसान जो कभी हार नहीं मानता...बहुत दिलचस्प लेख लिखा है आपने...बधाई...
नीरज

mahashakti said...

सौरव के सन्यास के बाद, कोलकाता नाईट राईडर का देखा गया पहला मैच था। मैने न्यूजीलैड दौरे का एक भी मैच नही देख जबकि नाईट राईडर का पहला मैच रात्रि 12.15 तक देखा था। क्‍योकि इस टीम में मेरे दो प्रिय खिलाड़ी शामिल थे। जो आज भारतीय टीम में नही है।