Sunday, November 9, 2008

सीरिज के आखिरी दिन पोंटिंग के सामने कप्तान धोनी से पार पाने की चुनौती

आस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग के 13 साल के यादगार टेस्ट करियर में कितने ही सोमवार आकर चले गए। लेकिन,नागपुर के विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन के मैदान पर इंतजार करता सोमवार उनका सबसे कड़ा इम्तिहान लेने जा रहा है। सीरिज के आखिरी दिन गावस्कर बॉर्डर ट्रॉफी पर कब्जा बरकरार रखने के लिए उन्हें 369 रनों की चढ़ाई करनी है। सिर्फ यही एक सूरत है कि अपनी कप्तानी में आस्ट्रेलिया को लगातार 16 और कुल जमा 33 जीत दिला चुके पोंटिंग सम्मान के साथ घर लौट सकें। जीत की पहचान को लेकर बनी आस्ट्रेलियाई इमेज को एक नए सिरे से गढ़ सकें। लेकिन,वो अगर इस लक्ष्य से आखिरी कदम के फासले से भी चूक गए तो उनके जेहन में इस शिकस्त के लिए सिर्फ और सिर्फ एक ही नाम उभार लेगा-भारतीय कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी।

आखिर, अब से 50 दिन पहले पोंटिंग ने अपने साथियों के साथ भारत की उड़ान भरी थी तो उनके सामने चुनौतियों की एक लंबी फेहरिस्त थी। वीरेन्द्र सहवाग से शुरु होकर वीवीएस लक्ष्मण, हरभजन सिंह से होते हुए ईशांत शर्मा तक। फ्रेम दर फ्रेम ये चेहरे पोंटिंग और उनके साथियों के बीच एक बहस में तब्दील होते रहे होंगे। भारत आस्ट्रेलिया सीरिज को एशेज से कई पायदान ऊपर ठहरा रहे आलोचक भी पोंटिंग-ईशांत शर्मा, पोंटिंग-हरभजन,हेडन-जहीर,ब्रेटली-सचिन के संघर्ष के बीच सीरिज के संभावित रोमांच को महसूस कर रहे थे। लेकिन,इनमें कहीं महेन्द्र सिंह धोनी का नाम नहीं था। इसके बावजूद कि इसी साल की शुरुआत में धोनी ने पोंटिंग की इस आस्ट्रेलियाई टीम को उसी के घर में अपनी बेजोड़ कप्तानी मे ट्राइंगुलर सीरिज में शिकस्त दी थी।

दरअसल,इस सीरिज में कुंबले नहीं धोनी की कप्तानी ही कसौटी पर थी। ट्वेंटी 20 के वर्ल्ड चैंपियन और वनडे के नए बादशाह धोनी को अभी टेस्ट में कप्तानी के लिए तैयार नहीं माना जा रहा था। लेकिन,धोनी की कप्तानी ही भारत और आस्ट्रेलिया के बीच हार और जीत का सबसे बड़ा फासला बनकर उभार ले रही है। सचिन तेंदुलकर से लेकर सौरव गांगुली,गौतम गंभीर से लेकर वीरेन्द्र सहवाग या लक्ष्मण तक या गेंदबाजी मे जहीर से लेकर ईशांत शर्मा या हरभजन से लेकर अमित मिश्रा तक-सबने इस सीरिज में अपनी छाप छोड़ी है। लेकिन, इन सबके बीच भी सबसे बड़े चेहरे के तौर पर धोनी ही उभार ले रहे हैं।

आखिर,रविवार को जीत की ओर बढ़ रही भारतीय पारी लंच और चयकाल के बीच अचानक चरमरा गई। वीरेन्द्र सहवाग और मुरली विजय की ठोस शुरुआत के बावजूद भारतीय पारी देखते ही देखते बिना विकेट पर 116 रन से छह विकेट पर 166 रन पर आकर लड़खड़ाने लगी। शेन वाटसन और जैसन क्रेजा के सामने महज 50 रन के दरम्यान भारत के पहले छह बल्लेबाज ड्रेसिंग रुम लौट गए। इस मोड़ पर भारत के पास केवल 252 रन की बढ़त थी। भारत की पारी के आखिरी चार विकेट हासिल करते हुए आस्ट्रेलिया मुकाबले में अपनी गिरफ्त मजबूत कर लेने की कगार पर था। आलोचकों की निगाह अब धोनी की कप्तानी पर थी। धोनी कैसे इस नाजुक मोड़ से भारतीय पारी को किनारे तक ले जाते हैं। धोनी किस अंदाज मे इस चुनौती से पार पाते हैं।

लेकिन,धोनी इस कसौटी पर खरे उतरे। अपनी आक्रामक छवि से हटकर धोनी ने जरुरत के मुताबिक अपनी टीम के लिए रन बटोरे। साथ ही, अपने साथी हरभजन सिंह को सीरिज में एक और अहम पारी खेलने के लिए प्रेरित किया। इसी का नतीजा था कि इन दोनों ने इस नाजुक मोड़ पर सांतवे विकेट के लिए 108 रन की साझेदारी की। इसमे भी धोनी की बल्लेबाजी सोच सबकी निगाहों में ठहर गई। वनडे क्रिकेट में अपनी भूमिका में लगातार बदलाव कर रहे धोनी ने यहां टेस्ट में भी एक नए बल्लेबाज धोनी से रुबरु कराया। धोनी ने 81 गेंदों में अपने 55 रनों के दौरान 19 सिंगल्स लेते हुए बराबर स्ट्राइक बदलते हुए आस्ट्रेलियाई गेंदबाजों के लिए विकेट तक की राह को मुश्किल बनाया।

धोनी अपनी इस बल्लेबाजी से क्रिकेट चहेतों को डेढ साल पहले लॉर्ड्स पर खेली अपनी एक और बेजोड़ पारी की ओर लौटा ले गए। इंग्लैंड के खिलाफ चौथी पारी में 380 रनों का पीछा कर रहा भारत एक वक्त 145 रन पर पांच विकेट गंवा चुका था। मुकाबले के इस मोड़ से ड्रॉ तक ले जाने के लिए भारत को अभी 48 ओवर और खेलने थे। धोनी ने अपनी आक्रामक छवि से हटकर 76 रन की बेहद ठोस पारी खेली। करीब साढ़े तीन घंटे तक एक छोर पर मजबूती से थामे रखा। इस हद तक कि वीवीएस लक्ष्मण के वापस लौटने के बावजूद भारत इस तय हार को टालने में कामयाब रहा। मैच के आखिरी बीस ओवर मे धोनी के साथ दूसरे छोर पर कुंबले,जहीर खान,आरपी सिंह और श्रीसंत ही बचे थे। इनमें भी श्रीसंत के साथ तो धोनी ने आखिरी विकेट को बचाए रखने के लिए बेहद परिपक्वता से बल्लेबाजी की। आखिरी पांच ओवर में उन्होंने श्रीसंत को सिर्फ सात गेंदों के लिए इंग्लैंड गेंदबाजों के सामने आने दिया। लॉर्ड्स में ड्रॉ रहा ये टेस्ट ही था,जिसके बाद भारत ने सीरिज पर ही कब्जा जमा लिया।

इस सीरिज में भी कप्तान धोनी ने मोहाली में अपने बल्ले से ऐसी छाप छोड़ी कि पोंटिंग के लिए ट्रॉफी को बरकरार रखना मुश्किल दर मुश्किल होता चला गया। मोहाली में आठवें नंबर पर बल्लेबाजी करने आए धोनी ने 92 रन की एक बड़ी पारी खेली। इस पारी में जरुरत के मुताबिक आक्रमण का भरपूर समावेश था। आठ चौके और चार छक्कों से सजी इस पारी के दौरान धोनी ने गांगुली के साथ सातवें विकेट के लिए सिर्फ बीस ओवर में 109 रन जोड़ डाले। इतना ही नहीं,मैच के चौथे दिन आस्ट्रेलिया को दबाव में लाने के लिए एक बार फिर तेज रनों की दरकार थी,तो धोनी तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने पहुंचे। पहली पारी में भी सौरव गांगुली के साथ अहम मौके पर महत्‍वपूर्ण साझेदारी करने वाले धोनी ने इस बार 84 गेंदों में 55 रनों की ठोस पारी के दौरान 19 सिंगल्‍स लेकर आस्ट्रेलिया को सीरिज में शिकस्त की ओर धकेलने की शुरुआत की।


इस सीरिज में यह सिर्फ धोनी के बल्ले की ही बात नहीं है। धोनी की कप्तानी भी कसौटी दर कसौटी खरी साबित हो रही है। मोहाली में ही जीत तक पहुंचने की राह में कुंबले की जगह अपना पहला टेस्ट खेल रहे अमित मिश्रा से लेकर अनुभवी हरभजन सिंह तक का बेहतरीन इस्तेमाल धोनी ने किया। खासतौर से चौथे दिन शाम आठवें ओवर मे ही हरभजन सिंह की ओर गेंद उछालते हुए मुकाबले का सबसे बड़ा दांव खेला। हरभजन ने सिर्फ दस गेंदों के बीच ही हेडन, कैटिच और हसी के विकेट लेते हुए मुकाबले पर भारत की मुहर लगा दी थी। नागपुर टेस्ट में ही धोनी ने अपनी सूझबूझ भरी कप्तानी से कैटिच और हसी की साझेदारी से एडवांटेज की ओर बढ़ रही आस्ट्रेलियाई पारी को बैकफुट पर ला खड़ा किया। तमाम आलोचनाओं के बावजूद ऑफ साइड की मजबूत घेराबंदी के बीच ऑफ स्टंप की दिशा पकड़कर गेंदबाजी की हिदायत देते हुए। रनों के प्रवाह को रोकते हुए धोनी ने पहले उनकी बल्लेबाजी लय को तोड़ा और फिर आस्ट्रेलियाई पारी को।

अब इस सीरिज के आखिरी दिन पोंटिंग को इसी कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी से जूझना है। किस तरह पोंटिंग धोनी की बिछायी बिसात से अपनी मंजिल तलाशते हैं,इस पर सबकी निगाह रहेगी। नतीजा कुछ भी हो,लेकिन इतना तय है कि घर लौटते पोंटिंग भारतीय चुनौतियों की फेहरिस्त एक नए सिरे से तैयार करेंगे। इसमें सबसे पहला नाम होगा-महेन्द्र सिंह धोनी का। अपने आखिरी पढ़ाव पर पहुंची गावस्कर बार्डर ट्रॉफी से यही सबसे बड़ा पहलू उभरकर सामने आ रहा है।

1 comment:

Udan Tashtari said...

कल का दिन बड़ा रोमांचकारी खेल होगा, यह तो तय है. भारतीय टीम को शुभकामनाऐ‍.